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हो गया खुलासा टीम के कोच तुषार अरोठे को हरमनप्रीत के कहने पर हटाया गया
Khabar India TV | 12th Jul, 2018 08:04 PM

नयी दिल्ली: सीनियर महिला क्रिकेटरों के नकारात्मक फीडबैक के बाद कोच पद छोड़ने के लिये मजबूर होने वाले तुषार अरोठे ने कहा कि प्रशिक्षकों (कोच) के भाग्य का फैसला खिलाड़ियों के हाथों पर छोड़ने से गलत मानदंड स्थापित होंगे। 

भारतीय महिला टीम को विश्व कप फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले 51 साल के अरोठे को सीनियर खिलाड़ियों खासकर ट्वेंटी20 की कप्तान हरमनप्रीत कौर की शिकायत के बाद बीसीसीआई ने पद से हटा दिया था। उन्हें उनके प्रैक्टिस करवाने के तरीकों से शिकायत थी। 

अरोठे ने कहा,‘‘अगर विद्यार्थियों ने शिक्षक की मौजूदगी के बावजूद अपना पाठ्यक्रम तय करना शुरू कर दिया तो मुझे नहीं लगता कि यह अच्छा है। इसी तरह से अगर सिर्फ खिलाड़ियों के आरोपों के आधार पर कोच हटाये जाने लगे तो फिर आप गलत मानदंड स्थापित कर रहे हैं।’’

अरोठे ने कहा कि खिलाड़ियों के नाखुश होने पर इस तरह से प्रशिक्षकों को लगातार हटाने से पता चलता है कि कौन गलत है। उन्होंने कहा,‘‘मेरे से पहले कोई और (पूर्णिमा राव) था जिसे इसलिए हटाया गया क्योंकि खिलाड़ी उसे नहीं चाहती थी। अब उन्हें मेरी शैली पसंद नहीं है। कल नया कोच आएगा और हो सकता कि उन्हें वह भी पसंद नहीं आये। इसलिए अगर सिर्फ एक पक्ष को समस्या है तो इसका क्या मतलब निकलता है।’’ 

अरोठे की प्रशिक्षण शैली पर सवाल खड़े किये गये। इसके अलावा उन पर टीम का ‘रिमोट कंट्रोल’बनने का आरोप भी लगाये गये। 

अरोठे ने हालांकि कहा कि उन पर लगाया गया हर एक आरोप गलत है और जब उन्हें बुलाया गया तो उन्होंने प्रशासकों की समिति के सामने अपना पक्ष रखा था। 
उन्होंने कहा,‘‘मुख्य आरोप रोज दो प्रैक्टिस सेशन को लेकर था। लड़कियों को एशिया कप तक कोई दिक्कत नहीं थी। यह प्रक्रिया पिछले साल के विश्व कप से पहले शुरू की गयी थी। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि जो सुबह के सेशन में बल्लेबाजी या गेंदबाजी करते हैं उन्हें दोपहर या शाम के सेशन में आराम दिया जाता है। आप नंबर एक टीम बनना चाहते हैं और कड़ी मेहनत नहीं करना चाहते हैं। ऐसे में तो यह संभव नहीं है।’’

बीसीसीआई के साथ बैठक के दौरान उनसे कहा गया कि एक सीनियर खिलाड़ी ने बताया कि था वह गेंदबाजों को नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी करने के लिये मजबूर करने करने की कोशिश करते थे। 

अरोठे ने कहा,‘‘मुझसे पूछा गया कि तुमने लड़कियों को नेगेटिव लाइन (लेग स्टंप की लाइन) पर गेंदबाज करने के लिये क्यों कहा। मैंने कहा कि हमारे पास मैच की रिकार्डिंग है। वीडियो की समीक्षा कीजिए और मुझे बताईये कि किस ओवर में गेंदबाज ने नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी की। जब ये आरोप लगाये गये तब कम से कम उन्हें यह सोचना चाहिए था कि टी20 में लंबे फॉर्मेट की तरह नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी करना मुश्किल है।’’ 

अरोठे ने हालांकि सीनियर खिलाड़ी मिताली राज और झूलन गोस्वामी की तारीफ की। उन्होंने कहा,‘‘मिताली और झूलन का रवैया बेहद सहयोग वाला रहा और वे टीम बैठकों चर्चा के लिये तैयार रहती थी। जहां तक हरमनप्रीत का सवाल है तो मेरे मन में उसके प्रति कुछ भी नेगटिव नहीं है। वह अच्छी क्रिकेटर है लेकिन मुझे हैरानी हुई कि जब मैंने पूछा कि किसने शिकायत की तो मुझे बताया गया कि ‘कप्तान ने बोला। मैं उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनाएं देता हूं।’’ 

   
 
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