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Helicopter Eela Movie Review: काजोल ने स्क्रीन पर जान फूंक दी, फिर भी उड़ नहीं पाई हेलीकॉप्टर ईला
Oneindia | 12th Oct, 2018 11:15 AM

फिल्म में एक सीन है जिसमें काजोल आंखों में आंसू भरे हुए अपने बेटे विवान से बताती है कि उसे इस उम्र में नए दोस्त बनाने में परेशानी होती है.. जैसे विवान को बचपन में होती थी। इस सीन को देखकर आप भी इमोशनल हो जाएंगे.. वहीं फिल्म की खूबसूरती ही यही है कि इस फिल्म में कई ऐसे सीन है जो आपके दिल में गहराई तक उतर जाएंगे।

प्रदीप सरकार की डारेक्टोरियल ये फिल्म एक सिंगल पेरेंट ईला (काजोल) के इर्द-गिर्द घूमती है। जिसकी जिंदगी उसके बेटे विवान (रिद्दी सेन) के आस पास रहती है और वो खुद भी हमेशा उसी के पीछे-पीछे रहना चाहती है। जहां एक तरफ विवान को स्पेस चाहिए वहीं उसकी मां ईला हाथ में डब्बा लिए हमेशा एक क्रेजी स्टॉकर की तरह उसके पीछे-पीछे ही रहती है। विवान परेशान हो जाता है लेकिन ईला नहीं मानती।

हेलीकॉप्ट ईला आपको ईला रायतुरकर की दुनिया में ले जाती है जहां रेडियो पर सुनीता राव का 'परी हूं मैं' बज रहा है। हमें पता चलता है कि ईला 90s के दौर में सिंगर थी। इसके साथ ही तैयार रहिए फिल्म में पॉप कल्चर और कई उस दौर के गानों और म्यूजिक के लिए। ईला अब अपने बेटे के पीछे है। वो उसका पीछा करते-करते विवान के कॉलेज में स्टूडेंट बनकर पहुंच जाती है।

जहां बॉलीवुड में आमतौर पर पेरेंट्स को त्याग की मूरत या फिर विलेन बनाकर पेश किया जाता है। वहीं हेलीकॉप्टर ईला में एक फ्रेश चेंज देखने को मिलेगा।

फिल्म का फर्स्ट हाफ म्यूजिक के लिए ईला का एम्बिशन और अरुण (टोटा रॉय चौधरी) के साथ उसकी लव स्टोरी दिखाने में निकल जाता है। वहीं इंटरवल के बाद फिल्म में मां-बेटे के बीच दिल को छू लेने वाले पल और दोनों के बीच झगड़े आपको भी इमोशनल कर देंगे।

वहीं दूसरी तरफ, फिल्म में ईला के पति का उसकी जिंदगी से चले जाना ठीक से एक्सप्लेन नहीं किया गया है, जो वाकई बकवास लगता है। फिल्म में कई बार ऐसा मैलोड्रामा देखने को मिलता है जो काफी उबाऊ लगता है। हेलीकॉप्टर ईला एक गुजराती नाटक पर आधारित है, जिसका नाम है- 'बेटा, कागड़ो।' आनंद गांधी और मितेश शाह का लेखकर काफी भटका हुआ है। जहां एक तरफ फिल्म में ये शानदार मैसेज है कि एक औरत को शादी और मां बनने के बाद खुद की पहचान नहीं खोनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ प्रतीप सरकार का ढ़ीला-ढ़ाला निर्देशन हेलीकॉप्टर ईला को असाधारण नहीं बना पाता।

परफॉर्मेंस की बात करें तो काजोल इस फिल्म की जान हैं। काजोल को स्क्रीन पर देखकर ऐसा मालूम होता है जैसे कि वे और भी यंग और चुलबुली होती जा रही हैं। फिल्म में काजोल ईला के किरदार में ऐसा चार्म और एनर्जी भर देती हैं कि बस देखते ही बनता है। रिद्धी सेन ने भी फिल्म में शानदार काम किया है। फिल्म काजोल और रिद्धी की कैमिस्ट्री जबरदस्त लगी है।

नेहा धूपिया ने भी अपना रोल काफी अच्छे से अदा किया है। वहीं टोटा रॉय चौधरी का किरदार बेकार तरीके से लिखा गया है।

सिरिशा रे की सिनेमैटोग्राफी में कुछ नया मालूम नहीं होता है। धर्मेंद्र शर्मा की एडिटिंग कई जगहों पर काफी उधड़ी लगती है। फिल्म में मम्मा की परछाई और यादों की अलमारी के अलावा कोई खास म्यूजिक भी नहीं है।

शानदार कहानी के बावजूद प्रदीप सरकार हेलीकॉप्टर ईला को असाधारण फिल्म नहीं बना पाए। हालांकि काजोल फिल्म की जान हैं और बाकी स्टार्स ने भी अच्छा परफॉर्म किया है। हमारी तरफ से इस फिल्म को 2.5 स्टार।

   
 
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