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सर्दियों में क्‍यों जरूरी है विटामिन सी, जानें कितनी मात्रा में लेनी चाह‍िए?
Boldsky | 19th Jan, 2019 09:02 AM
  • हो सकता है गर्भपात

    विटामिन सी की कमी के कारण कई बीमारियां जैसे मोतियाबिंद, चर्म रोग, गर्भपात, रक्ताल्पता, भूख न लगना इत्यादि हो सकती हैं। विटामिन सी शरीर को कई बीमारियों से तो बचाता ही है, साथ ही सांस संबंधी बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं से भी निजात दिलाता है


  • स्‍कर्वी से दिलाएं

    विटामिन सी न सिर्फ स्कर्वी नामक रोग से बचाता है बल्कि इससे कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है, और तो और मस्तिष्क के कार्य करने में भी ये सहायक है। विटामिन सी की मदद से हड्डियों को जोड़ने वाले कोलाजेन पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, लिगामेंट्स, कार्टिलेज आदि अंगों का पूर्णरूप से निर्माण संभव है।


  • मस्तिष्‍क के ल‍िए महत्‍वपूर्ण

    विटामिन सी मस्तिष्क में एक रसायन सेराटोनिन के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सेराटोनिन नामक रसायन हमारी नींद के लिए ज़रूरी है। विटामिन सी कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित काबू में रखता है।


  • कोशिकाओं में ऊर्जा प्रवाहित करता है

    लौह तत्वों को भी विटामिन सी से ही आधार मिलता है। शरीर में विटामिन सी कई तरह की रासायनिक क्रियाओं को अंजाम देता है जैसे कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना आदि।


  • आंखों के ल‍िए फायदेमंद

    विटामिन सी आंखों के रोग ग्लूकोमा से आंखों का बचाव करता है। विटामिन सी शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। इसकी कमी से कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। विटामिन सी संतुलित मात्रा में खाना फायदेमंद है।


  • विटामिन सी के कमी के संकेत?

    अक्सर सर्दी जुकाम होना, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, थकावट, अचानक वजन कम होना, ड्राई बाल होना, बालों का गिरना, त्वचा की असमान रंगत, घाव का धीरे भरना व दांत संबंधी समस्याएं, विटामिन सी की कमी के लक्षण माने जाते हैं।


  • कितना मात्रा में लेनी चाहिए

    प्रतिदिन 2000 मिलीग्राम से अधिक की मात्रा संभवत: असुरक्षित होती है और इससे कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें गुर्दे की पथरी और गंभीर दस्त शामिल हैं। जिन लोगों में गुर्दे की पथरी होती है, उनमें प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम से अधिक मात्रा में गुर्दे की पथरी दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है।


  • ये है विटामिन सी का स्‍त्रोत

    विटामिन सी को खाद्य पदार्थों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। आमतौर पर विटामिन सी के अच्छे स्रोत आलू, टमाटर, संतरा हैं। इनके अलावा लाल मिर्च, अनानास, स्‍ट्रॉबेरी, सेब, खट्टे रसीले फल, कच्चे फलों और सब्जियों में भी विटामिन सी पाया जाता है। आंवला, नारंगी, नींबू, अंगूर, अमरूद, केला, बेर, कटहल, शलगम, पुदीना, मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया, और पालक इत्यादि भी विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं।




विटामिन सी शरीर के ल‍िए आवश्‍यक तत्‍वों में से एक तत्‍व हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही कई तरह के इंफेक्‍शन से दूर रखता है। कुछ जीवों में विटामिन सी खुद बनाने की क्षमता होती है, वहीं मनुष्‍य को भोजन और अन्य स्रोतों से यह विटामिन प्राप्त करना पड़ता है।

विटामिन सी के अच्छे स्रोत ताजे फल और सब्जियां हैं, खासकर खट्टे फल। विटामिन सी को केमिकल के जरिए लैब में भी बनाया जा सकता है। विटामिन सी को एस्कॉर्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए अति आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है। आइए जानते है कि इसकी कमी से शरीर में क्‍या समस्‍याएं हो सकती है।

   
 
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