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'भारत' फिल्म रिव्यू: ऐवरेज कहानी को बचाती है सलमान- कैटरीना की बेहतरीन कैमिस्ट्री
Oneindia | 5th Jun, 2019 10:53 AM
  • भारत की कहानी

    मां (सोनाली कुलकर्णी), दो बहनें और छोटे भाई की जिम्मेदारी लिए भारत भारत अपनी बुआ के घर पहुंचता है और फिर उन्हीं के साथ रहता है। बुआ का जनरल स्टोर भारत को अपनी जान से भी प्यारा है क्योंकि पिता का वादा है कि वह वहीं आकर मिलेंगे।

    इस दौरान उसकी दोस्ती होती है विलायती (सुनील ग्रोवर) से। सालों साल अपने परिवार का पेट पालने के लिए भारत अलग अलग काम करता है। और हर काम में उसके साथ खड़ा रहा विलायती।

    पहले दोनों ग्रेट रशियन सर्कस में नौकरी करते हैं, जहां भारत की दोस्ती होती है राधा (दिशा पटानी) से। सर्कस में कुछ सालों तक नौकरी कर, भारत और विलायती दूसरी नौकरी तलाशते हैं। 1970 का समय है, जब खाड़ी देशों में तेल निकला था और भारत से भी कई मजदूर वहां भेजे जाने थे। उन्हीं मजदूरों में भारत और विलायती का भी चुनाव हो जाता है। इस प्रक्रिया में भारत की मुलाकात होती है कुमुद (कैटरीना कैफ) से, जो कि चीफ इंजिनियर होती हैं। भारत को जहां मैडम सर (कुमुद) से पहली नजर में ही प्यार हो जाता है, वहीं भारत की अच्छाई और हिम्मत कुमुद को भा जाती है।


  • भारत की कहानी

    कई मुश्किलों का सामना कर, खाड़ी देश से पैसा कमाकर भारत अपने घर लौट आता है। लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए फिर वह मर्चेंट नेवी में भर्ती हो जाता है।

    इस दौरान भारत में आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण का दौर आता है, जब भारत में कई नए कंपनी ने कदम रखा। कुमुद जो कि एक टेलीविजन चैनल में काम कर रही है, एक शो के जरीए ऐसा मुहिम शुरु करती है, जिससे भारत- पाकिस्तान विभाजन में बिछड़े लोग अपने परिवार वालों से मिल पाएं, अपने घरों को जा सकें। भारत इस मुहिम का हिस्सा बनता है। लेकिन क्या इस शो के जरीए भारत अपने पिता और छोटी बहन को वापस ला पाएगा.. यह देखने के लिए आपको थियेटर तक जाना पड़ेगा।


  • अभिनय

    भारत के किरदार में सलमान खान को निर्देशक ने अपने भाव को दिखाने का पूरा मौका दिया है। गंभीरता, कॉमेडी, संवेदनशीलता, एक्शन.. इस फिल्म में सलमान खान ने हर पहलू को छुआ है। हालांकि बुढ़ापे को निभाने में थोड़ी कमी नजर आई। वहीं, कैटरीना कैफ ने भी कुमुद के साथ पूरा न्याय किया है। कुछ सीन में उन्होंने जबरदस्त का हावभाव दिखाया है।

    दिशा पटानी अपने छोटे से रोल में आकर्षक लगी हैं। जैकी श्राफ, सोनाली कुलकर्णी, बिजेन्द्र काला, सतीश कौशिक, आसिफ शेख अपने किरदारों में सराहनीय हैं। जबकि विलायती के रोल में सुनील ग्रोवर ने बेहद उम्दा काम किया है। निर्देशक ने उन्हें किरदार को निखारने का पूरा मौका दिया है और सुनील ग्रोवर ने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया है। सलमान खान के साथ सुनील के कॉमेडी सीन्स जहां हंसाते हैं, वहीं इमोशनल सीन में भी दोनों जिगरी यार लगे हैं। छोटे से रोल में तबू प्रभावी हैं।


  • निर्देशन

    सुल्तान और टाईगर जिंदा है जैसी फिल्मों के निर्देशक अली अब्बास जफर यहां थोड़े कमजोर नजर आए। फर्स्ट हॉफ में पटकथा कुछ कमजोर दिखी, लेकिन सेकेंड हॉफ में निर्देशक ने संभाल लिया। फिल्म बोर नहीं करती है, लेकिन खास उत्साह भी नहीं जगाती। फर्स्ट हॉफ में कुछ सीन ढूंसे हुए से लगे। तो कुछ किरदारों को यूं ही छोड़ दिया गया है।

    अली अब्बास जफर के साथ अच्छी बात है कि वह सलमान खान के ऑडियंस को भली भांति पहचानते हैं। लिहाजा, उन्होंने कोरियन फिल्म (Ode To My Father) की रीमेक होने के बावजूद भारत में हर मसाला डालने की कोशिश की है.. चाहे वह सीटीमार डायलॉग्स हो या एक्शन सीन्स।


  • संगीत

    टाइटल ट्रैक 'जिंदा' को छोड़कर फिल्म में विशाल- शेखर का संगीत ऐवरेज है। फिल्म के गाने टाइमपास हैं और कहानी को लंबा करते हैं।


  • ढ़ाई स्टार

    ईद पर मौके पर आई सलमान खान की 'भारत' आपको इंटरटेन करेगी। सलमान खान फैंस फिल्म को काफी एन्जॉय कर सकते हैं। फिल्म ज्यादा समय तक आपके साथ नहीं टिकेगा, लेकिन एक बार जरूर देखा जा सकता है। हमारी ओर से फिल्म को ढ़ाई स्टार।




'जितने सफेद बाल मेरे सिर और दाढ़ी में हैं, उससे कहीं ज्यादा रंगीन मेरी जिंदगी रही है'

इसी के साथ शुरु होता है भारत (सलमान खान) का सफर। 70 वर्षीय भारत अपनी दुकान को बिकने से बचाने से गुडों से लड़ते हैं क्योंकि उस दुकान से उनकी भावनाएं जुड़ी हैं और कुछ कहानी भी। यह कहानी बताने के लिए फिल्म हमें लगभग 60 साल पीछे ले जाती है।

भारत- पाकिस्तान विभाजन का समय है और सभी हिंदू परिवारों की भांति भारत (सलमान) का परिवार भी अपने वतन आने वाली आखिरी ट्रेन में चढ़ने की जद्दोजहद करते हैं। इस भाग दौड़ में भारत की छोटी बहन और उसके पिता (जैकी श्राफ) पाकिस्तान में ही छूट जाते हैं। जुदा होते होते पिता भारत से वादा लेते हैं कि जब तक वह वापस ना आ जाएं, वह हमेशा अपने परिवार को ख्याल रखेगा, उन्हें एक रखेगा। पिता का वादा भारत के दिलों दिमाग पर छप जाता है।

   
 
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