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करगिल के बंकरों से IIM तक पहुंचा ये युवा, अब जम्‍मू कश्‍मीर में कोचिंग देने की ख्‍वाह‍िश
Boldsky | 26th Jul, 2019 12:25 PM

करगिल का नाम आते ही हर हिंदुस्तानी के जेहन में 1999 का वह भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्‍मृतियां उतर आती है। जिसमें भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी, सिर्फ युद्ध स्‍मृति त‍क सिमट चुके इस जगह से जुड़ा हर शख्‍स अतीत की धूमिल यादों से न‍िकलकर भविष्‍य की नई राहों को तलाश कर रहे हैं। ताकि वो इस शहर से जुड़ी बुरी यादें मिटाकर इस शहर के ल‍िए एक नया कल संजो सकें।

इसी म‍कसद के साथ करगिल के रहने वाले मुजामिल अनवर, करगिल में रहने वाले बच्‍चों के ल‍िए ऐसे संस्थान का सपना देखा है, जहां जम्मू-कश्मीर के आम बच्चे मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों के एडमिशन टेस्ट की तैयारी करके अपने आने वाले कल को बेहतर बना सकें।

कभी करगिल युद्ध के दौरान अपने घर के बाहर बने बंकरों में क्रिकेट खेलने वाले मुजामिल देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अहमदाबाद से ग्रेजुएट हैं और फिलहाल वेदांता समूह के साथ काम कर रहे हैं। मुजामिल फिलहाल राजस्थान के उदयपुर में रहते हैं और वेदांता समूह के सीएसआर हैंडल के साथ काम कर रहे हैं। 30 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर कैंपस प्लेसमेंट में सेलेक्ट हुए मुजामिल को वेदांता समूह ने राजस्थान और गोवा में वर्ल्ड क्लास फुटबॉल लर्निंग सेंटर बनाने की जिम्मेदारी दी है।

करगिल की तस्वीर बदलना चाहते है

एक इंटरव्‍यू के दौरान मुजामिल अनवर ने कहा कि वह करगिल के बच्चों के लिए एक कोचिंग सेंटर खोलना चाहते हैं। जहां जम्मू-कश्मीर के युवा बी-स्कूल्स के कॉमन ऐडमिशन टेस्ट (कैट) की तैयारी कर सकें। यहां के युवा पढ़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही द‍िशा नहीं मिल पा रही है। लेकिन वो यहां एकेडमी खोलकर लोगों के लिए नई उम्‍मीद और द‍िशा देने चाहते हैं।

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आईआईएम जैसे संस्थानों से बेखबर है लोग

मुजामिल ने कहा कि साल 2016-18 में मेरे साथ के तमाम लोगों ने मुझसे 'आईआईएम' में जाने और कैट क्रैक करने की स्ट्रैटेजी पूछी, लेकिन इनमें से करगिल का कोई भी नहीं था। वहां के लोगों को अब तक ऐसे संस्थानों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बच्चें आज भी सिर्फ इंजिनियरिंग और मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन मैं जम्मू-कश्मीर सरकार से मदद मांगने की योजना बना रहा जिससे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए आईआईएम जैसे संस्थानों में जाने का रास्ता आसान हो सके।

   
 
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