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'द जोया फैक्टर' फ़िल्म रिव्यू- क्रिकेट, किस्मत और रोमांस के बीच हावी रहा 'दुलकर' फैक्टर
Oneindia | 20th Sep, 2019 03:30 AM
  • फिल्म की कहानी

    बतौर सूत्रधार शाहरुख खान की आवाज़ के साथ कहानी शुरु होती है। और हमें मिलाया जाता है जोया सोलंकी (सोनम कपूर) से। जिसका जन्म उसी दिन हुआ होता है, जिस दिन 1983 में भारत ने क्रिकेट विश्व कप जीता था। अपने परिवार के बीच वह क्रिकेट के लिए लकी मानी जाती है, लेकिन व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में उसके सितारे गर्दिश में हैं। ऐसे में जोया की जिंदगी तब पलट जाती है, जब एक एड शूट करने के लिए वह भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों से मिलती है। एक ओर जहां टीम के कप्तान निखिल खोडा (दुलकर सलमान) को कुछ ही मुलाकातों में जोया से प्यार हो जाता है, वहीं धीरे धीरे टीम के बाकी खिलाड़ियों को जोया के लक चार्म यानि की भाग्यशाली होने का अंदाज़ा लगता है। जिस दिन जोया टीम के साथ बैठकर नाश्ता करती है, भारतीय टीम मुश्किल से मुश्किल मैच भी जीत जाती है। लिहाजा, कप्तान निखिल को छोड़कर पूरी क्रिकेट टीम और क्रिकेट बोर्ड चाहती है कि जोया हर मैच में उनके साथ रहे, ताकि वह लक के भरोसे हर मैच जीतते चले जाएं। क्रिकेट विश्व कप शुरु होने से पहले जोया को पूरी धूमधाम के साथ बतौर 'लकी चार्म' प्रमोट किया जाता है। वह जोया से जोया देवी बन जाती है। लेकिन जोया जल्द ही इस 'देवी' इमेज से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगती है। अब ऐसे में जोया की ज़िंदगी क्या करवट लेती है और निखिल के साथ उसके रिश्ते की गाड़ी कहां तक पहुंच पाती है, यह जानने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना होगा।


  • अभिनय

    जोया सोलंकी के किरदार में सोनम कपूर काफी जिंदादिल लगी हैं। फिल्म की पूरी कहानी जोया के इर्द गिर्द ही घूमती है, लिहाजा निर्देशक ने सोनम को अभिनय क्षमता दिखाने का पूरा पूरा समय दिया है। लेकिन कई दृश्यों में सोनम की ओवरएक्टिंग को आप नजरअंदाज़ नहीं कर पाएंगे। वहीं, दुलकर सलमान की बात करें तो, उन्होंने अपने दमदार अभिनय से खूब प्रभावित किया है। क्रिकेट कप्तान के रूप में जहां वो पूरे आत्मविश्वास के साथ दिखे हैं। वहीं, रोमांटिक और इंटेंस सीन्स में दुलकर आकर्षक लगे हैं। कह सकते हैं कि फिल्म में दुलकर सलमान को कास्ट करने का फैसला सटीक था। निर्देशक ने उनके हर हाव भाव को पर्दे पर लाने की कोशिश की है।

    जोया के भाई जोरावर सोलंकी के किरदार में सिकंदर खेर और जोया के पिता के किरदार संजय कपूर ने अच्छा काम किया है। सिकंदर खेर और संजय कपूर ने फिल्म में कुछ बेहतरीन कॉमेडी सीन्स दिये हैं। क्रिकेटर रॉबिन रावल के किरदार में अंगद बेदी ने भी शुरु से अंत तक अपने किरदार को पकड़ कर रखा है।


  • निर्देशन व तकनीकि पक्ष

    फिल्म इसी नाम से लिखी गई अनुजा चौहान की किताब पर आधारित है। लिहाजा, कुछ दर्शक इस कहानी से परिचित भी होंगे। निर्देशक अभिषेक शर्मा ने कहानी के साथ ज्यादा छेड़छाड़ किये बिना इस बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की और सफल भी रहे हैं। सिनेमाघर जाने से पहले यह समझ लें कि 'द जोया फैक्टर' कोई विषय प्रधान फिल्म नहीं है। यह हल्की फुल्की रोमांटिक कॉमेडी है, जहां क्रिकेट भी एक अहम रोल निभाता है। कुछ एक डायलॉग बेहतरीन बन पड़े हैं। एक सीन में जोया के घर बाहर प्रदर्शन करते लोग चिल्लाते हैं- देवी नहीं यह डायन है.... इस पर सोचें तो कई बातों को दर्शाता जाता है। देवी से डायन का सफर इस समाज में काफी छोटा होता है।

    कहानी कहीं कहीं धीमी लगती है, लेकिन बोर नहीं करती। उत्सव भगत की एडिटिंग बेहतरीन है। नेहा राकेश शर्मा और प्रधुमन सिंह ने पटकथा तैयार की है, जिसकी तारीफ होनी चाहिए। फिल्म का संगीत दिया है शंकर- एहसान- लॉय ने। जाहिर तौर पर इस तिकड़ी से हमेशा कुछ उम्दा की आशा रहती है, लेकिन यहां संगीत कुछ करामात नहीं कर सका।


  • देंखे या ना देंखे

    'द जोया फैक्टर' एक क्यूट रोमांटिक- कॉमेडी है। लिहाजा, इस वीकेंड एक हल्की फुल्की कहानी और दुलकर सलमान की बेहतरीन अदाकारी देखना चाहते हैं तो यह फिल्म एक बार सिनेमाघर में जरूर देखी जा सकती है। फिल्म में मनोरंजन 'फैक्टर' बराबर है। हमारी ओर से 'द जोया फैक्टर' को 3 स्टार।




कलाकार- सोनम कपूर, दुलकर सलमान, अंगद बेदी, संजय कपूर, सिकंदर खेर

निर्देशक- अभिषेक शर्मा

कुछ सालों पहले आई एक फिल्म में संवाद था कि 'हमारे देश में किसी को भगवान बनाना मुश्किल काम नहीं, यहां हर साल मार्केट में नए भगवान आ जाते हैं'। अभिषेक शर्मा की फिल्म 'द जोया फैक्टर' में भी इसकी एक झलक दिखाई गई है, जहां एक आम लड़की को भाग्यशाली मानकर देवी तक बना दिया जाता है। लेकिन लक यानि की भाग्य पर सबकुछ टालकर हम कामयाबी हासिल नहीं कर सकते। कामयाबी के लिए जरूरी है मेहनत और लगन। दुलकर सलमान और सोनम कपूर की फिल्म 'द जोया फैक्टर' ने देश- दुनिया में पल रहे अंधविश्वास जैसे मुद्दे को उठाया तो जरूर है, लेकिन काफी हल्के फुल्के तरीके से, एक रोमांटिक- स्पोर्ट्स ड्रामा के रूप में। यह फिल्म अनुजा चौहान की किताब 'द जोया फैक्टर' पर आधारित है।

   
 
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