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कर्नाटक: BJP विधायक ने कहा येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाने का रचा जा रहा षड्यंत्र
Khabar India TV | 9th Oct, 2019 06:14 PM

बेंगलुरु: भाजपा विधायक बी पाटिल यत्नाल ने बुधवार को कहा कि कुछ लोग येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। गौरतलब है कि यत्नाल पूर्व में दिए अपने बयानों के लिए पार्टी के गुस्से का सामना कर रहे हैं। यत्नाल ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “आप इसी तरह केंद्र से बाढ़ राहत के लिए सहायता लेने में एक महीने और देर कीजिए, और एक दिन येदियुरप्पा को पद से हटा दीजिए, यही आपका षड्यंत्र है।”

यत्नाल विजयपुरा से विधायक हैं और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में कुछ लोग षड्यंत्रकारियों से मिले हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि वह 77 वर्षीय येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री नहीं देखना चाहता तो उन्हें बता देना चाहिए लेकिन इसकी बजाय बाढ़ राहत सहायता राशि देने में देर की जा रही है और येदियुरप्पा के विरोधियों के हाथ मजबूत किए जा रहे हैं।

विजयपुरा में उन्होंने संवाददताओं से कहा, “आप येदियुरप्पा और उनके विरोधियों दोनों को बुलाइए। आपके (केंद्र सरकार) पास दोनों को सबक सिखाने की क्षमता है।” उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिल जाता है लेकिन येदियुरप्पा को नहीं मिलता। इससे क्या संदेश जाता है?”

कर्नाटक के भाजपा सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए यत्नाल ने कहा कि भाषणों से कुछ नहीं होता क्योंकि बाढ़ पीड़ित लोग भाषण नहीं सुनते। उन्होंने दो केंद्रीय मंत्रियों (सदानंद गौड़ा और प्रह्लाद जोशी) का नाम लिए बिना कहा कि मंत्रियों ने उनके बयानों को पार्टी हाईकमान के सामने गलत तरीके से पेश किया। यत्नाल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा तक अपनी यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि वह पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि हित में काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यत्नाल को पार्टी हाईकमान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ बयान देने के लिए 4 अक्टूबर को नोटिस जारी कर दस दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था। एक अक्टूबर को यत्नाल ने कहा था कि प्रधानमंत्री बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए ट्वीट करते हैं लेकिन कर्नाटक के बाढ़ ग्रसित इलाकों के लिए नहीं, इससे यह संदेश जाता है कि उन्हें कर्नाटक के लोगों की चिंता नहीं है क्योंकि यहां अभी चुनाव नहीं होने वाला।

   
 
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