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बाईपास रोड फिल्म रिव्यू : सस्पेंस पर सस्पेंस, लेकिन कहानी गायब- धीमा और बोझिल रहा सफर
Oneindia | 7th Nov, 2019 03:35 AM
  • कहानी

    निर्देशक ने फिल्म के पहले दृश्य एक संस्पेंस बरकरार किया है। गोली की आवाज आती है और शीशे की दीवार को तोड़ता एक आदमी नीचे गिर पड़ता है। लाश किसकी है? यह मर्डर है या आत्महत्या? और घटना की तह तक जाने के लिए कहानी फ्लैशबैक में चलती है। विक्रम कपूर (नील नितिन मुकेश) एक नामचीन फैशन लेबल का मालिक हैं और सुपरमॉडल सारा (शमा सिकंदर) के साथ Not So Serious रिश्ते में है। विक्रम की जिंदगी एक भयानक मोड़ लेती है, जब एक दिन सारा अपने घर में मरी हुई पाई जाती है और उसी रात विक्रम पर भयंकर एक्सीडेंट का शिकार हो जाता है। एक्सीडेंट के बाद विक्रम व्हिलचेयर तक सिमट कर रह जाता है। दूसरी तरफ पुलिस सारा के कातिल का पता लगाने में जुट जाती है। शक की सुई सारा के मंगेतर जिमी (ताहिर शब्बीर) पर जाती है। लेकिन पुलिस इंस्पेक्टर (मनीष चौधरी) मामले की तह तक जाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान एक के बाद एक परतें खुलती जाती हैं और कई कड़ियां जुड़ती हैं।


  • निर्देशन

    नमन नितिन मुकेश ने इस फिल्म के साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा है। उन्होंने कोशिश अच्छी की है, लेकिन कोई दो राय नहीं कि उन्हें अभी इस दिशा में काफी काम करने की जरूरत है। वहीं, फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद सभी विभाग को नील नितिन मुकेश ने खुद संभाला है। एक संस्पेंस थ्रिलर फिल्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है पटकथा.. वह जितनी मजबूत, संस्पेंस उतना बेहतर। लेकिन नील यहां चूक गए। फिल्म की पटकथा काफी बिखरी हुई सी है। कहानी कई बार आगे पीछे चलती है, जो भ्रांति पैदा करती है। सेकेंड हॉफ में आकर फिल्म में बैक टू बैक कई ट्विस्ट हैं, लेकिन कहीं नयापन नहीं दिखता है। वहीं, संवाद के मामले में भी फिल्म बेहद कमजोर है। उदाहरण के तौर पर- सारा नाराज होकर विक्रम से कहती है- ''मुझे हर्ट करोगे चलेगा, लेकिन मेरे ईगो को हर्ट करोगे, ये नहीं चलेगा..'' या ''You Can't finish me, because you're finished..''


  • अभिनय

    व्हिलचेयर पर बैठे विक्रम कपूर को घर में घुसकर मास्क पहना एक आदमी जान से मारना चाहता है, लेकिन विक्रम अपनी जान बचाने की हर संभव कोशिश करता है। फिल्म का यह दृश्य काफी अच्छा बन पड़ा है। नील नितिन मुकेश ने अच्छा काम किया है, लेकिन कमजोर कहानी उन्हें औसत बना गई। नील की गर्लफ्रैंड के किरदार में अदा शर्मा फिल्म में हैं या नहीं, इससे ना कहानी को ज्यादा फर्क पड़ता है, ना दर्शकों को। सुपरमॉडल बनीं शमा सिकंदर कोई प्रभाव नहीं छोड़ती हैं। वहीं, बतौर सह कलाकार गुल पनाग, रजित कपूर, मनीष चौधरी, सुधांशु पांडे भी अपने किरदारों के साथ असहज नजर आए।


  • संगीत

    फिल्म में गाने काफी असंगत लगते हैं। 'सो गया ये जहां, सो गया आसमां' जाहिर तौर पर आपके दिमाग में रह जाता है, लेकिन कहानी में कोई खास फर्क नहीं लाता है। बाकी गाने ध्यान नहीं खिंचती हैं। डैनियल बी जॉर्ड का बैकग्राउंड स्कोर असरदार है।


  • देंखे या ना देंखे

    फिल्म के एक सीन में दीवार पर फोकस किया जाता है, जहां लिखा है- 'Safety is cheers, accident is tears' .. बतौर दर्शक इस बात को गांठ बांध लें। इस रोड की सफर पर ना भी जाएं, तो चलेगा। बॉलीवुड ने हमें इतनी बेहतरीन संस्पेंस थ्रिलर फिल्में दी हैं कि उसके सामने 'बाईपास रोड' काफी औसत है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 2 स्टार।




कलाकार- नील नितिन मुकेश, अदा शर्मा, शमा सिकंदर, मनीष चौधरी, रजित कपूर, सुधांशु पांडे, गुल पनाग

निर्देशक- नमन नितिन मुकेश

बॉलीवुड ने दर्शकों को कई बेहतरीन क्राइम- थ्रिलर फिल्में दी हैं। इस शैली की फिल्मों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष होता है लेखन। जितना मजबूत और सधा हुआ लेखन, उतना ही दमदार संस्पेंस। लेकिन नील नितिन मुकेश की फिल्म 'बाईपास रोड' इसी पक्ष में कमजोर साबित हुई है। फिल्म में कई ट्विस्ट डालने की फिराक में कहानी बोझिल हो जाती है।

''जिंदगी और रास्ते एक जैसे होते हैं.. किस मोड़ पे बदल जाए पता नहीं चलता''.. नील नितिन मुकेश के इस संवाद की तरह ही फिल्म की कहानी भी कब किधर मुड़ जाती है, पता नहीं चलता।

   
 
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