Back
Home » Business
नोटबंदी : आज ही के दिन हुई थी, जानें फायदे और नुकसान
Good Returns | 8th Nov, 2019 12:57 PM

नई दिल्ली। वर्ष 2016 में आज ही के दिन यानी 8 नवंबर को मोदी सरकार ने अचानक नोटबंदी की घोषणा की थी। सरकार ने इसी दिन से उस समय प्रचलित 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट को बंद कर दिया था। बाद में इनके स्थान पर 500 रुपये का नया नोट चलाया था। वहीं 1000 रुपये का नोट बंद कर दिया था और इसकी जगह पर 2000 रुपये का नोट जारी किया गया था। मोदी सरकार ने जब नोटबंदी लागू की थी जो तर्क दिए थे कि इससे काला धन, आतंकवाद, जमाखोरी, नकली नोट की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। आज नोटबंदी को 3 साल हो चुके हैं।

नगदी पर नहीं लग पाई लगाम

पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के साथ ही नगदी के इस्तेमाल को घटाने के लिए कदम उठाने का भी ऐलान किया था। सरकार का कहना था कि जितना नगदी सर्कुलेशन कम होगी, भ्रष्टाचार उतना ही कम होगा। नोटबंदी के दौरान देश में करंसी की हिस्सेदारी करीब 86 फीसदी थी। नोटबंदी बाद कुछ महीनों तक कैश के इस्तेमाल में कमी दर्ज हुई लेकिन इस वक्त कैश का इस्तेमामल बढ़ा है। फिलहाल 22 लाख करोड़ रुपये की नगदी सिस्टम में है, जबकि नोटबंदी के वक्त 17.7 लाख करोड़ रुपये ही सिस्टम में थे।

नोटबंदी में लगभग पूरे नोट बदले

नोटबंदी के दौरान कालेधन पर चोट की बात की गई थी, लेकिन लगभग 99 फीसदी पुराने नोट लोग बदलने में कामयाब रहे। हालांकि नोटबंदी को मंजूरी देने वाले आरबीआई बोर्ड ने उस समय कहा था कि कालाधन का बड़ा हिस्सा नगदी के तौर पर नहीं, बल्कि एसेट्स में तब्दील हो जाता है। इसमें सोना या प्रॉपर्टी शामिल हैं।

नोटबंदी को ठहराया जा रहा मंदी का कारण

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अगस्त में भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को कम करते हुए इसका कारण नोटबंदी को बताया था। क्रिसिल के अनुसार मौजूदा स्लोडाउन की शुरुआत नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के साथ हुई थी। उपभोग में कमी देखने को मिली और इसके कारण नौकरियां घट गईं। वहीं लोगों की आय में कमी भी आई। वहीं अब मूडीज ने भारत की रेटिंग को स्टेबल से घटाकर नेगेटिव कर दिया है।

यह भी पढ़ें : ईपीएफओ की चेतावनी : ये काम न करें, नहीं तो डूबेगा पैसा

   
 
स्वास्थ्य