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गूगल ने अपने डूडल के जरिए जर्मनी की विश्व प्रसिद्ध "बर्लिन वॉल" को किया याद
Gizbot | 9th Nov, 2019 11:01 AM

आज गूगल ने अपने डूडल पर एक खास चीज बनाकर अपलोड की है। गूगल अक्सर अपने डूडल को किसी ना किसी विशेष व्यक्ति या किसी खास चीज के ऊपर समर्पित करते रहता है। आप सोच रह होंगे कि आज के डूडल में ऐसा क्या खास, ऐसी क्या खास बात है। आइए हम आपको आज के गूगल डूडल का इतिहास बताते हैं।

आज से ठीक साल 30 साल पहले आज ही के दिन बर्लिन की एक दीवार को गिराया गया था। उस दीवार का नाम जर्मन: Berliner Mauer बर्लीनर माउअर था। उस दीवार ने बर्लिन को दो भागों में बांट कर रखा था और दोनों के बीच में दरार बनाकर रखी थी। पश्चिमी बर्लिन और जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच में थी। इस वजह से बर्लिन शहरों 28 सालों तक पूर्वी और पश्चिमी टुकड़ों में बंटा हुआ था।

28 साल बाद टूटी दीवार

28 सालों के इस विवाद के बाद जर्मनी का एकीकरण करने के लिए वहां के लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से एक आंदोलन किया और भारी मात्रा में उसमें भाग लिया। इस आंदोलन का मकसद शीत युद्ध को खत्म करना और जर्मनी का एकीकरण करना था। आखिरकार जर्मनी वासियो को अपने इस काम में सफलता मिली और उन्होंने विश्व प्रसिद्ध हो चुकी बर्लिन की उस वॉल को 28 साल बाद गिरा दिया और फिर से एक हो गए।

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गूगल ने आज अपने डूडल में जर्मनी के इसी ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए उस बर्लिन दीवार गिरने के 30 साल पूरे होने पर जर्मनी वासियों को खुश होने का मौका दे रहा है। गूगल ने अपने आज के डूडल में एक दीवार दिखाई है, जो गिरा दी गई है और उसके बाद लोग आपस में गले मिल रहे हैं। ऐसा ही कुछ नज़ारा आज से ठीक 30 साल पहले भी देखने को मिला था।

दो भागों में बट गया था जर्मनी

जर्मनी की बर्लिन वॉल को 13 अगस्त 1961 में बनाने की शुरुआत की गई थी। 9 नवंबर 1989 के बाद इसे तोड़ दिया गया था। आपको बता दें कि बर्लिन की दीवार शीत शुद्ध का मुख्य प्रतीक थी। दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी का विभाजन हो गया था। इस वजह से लाखों लोग रोज पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन में जा रहे थे। पूर्वी बर्लिन से काफी कारोबारी, व्यापारी, राजनैतिज्ञ जैसे लोग पश्चिमी जर्मनी चले गए और इसकी वजह से पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनैतिक रूप से काफी नुकसान हुआ।

बर्लिन वॉल का मकसद पूर्वी जर्मनी छोड़कर जाने वाले लोगों को रोकना यानि प्रवासन (माइग्रेशन) को रोकना था। आपको बता दें कि बर्लिन की दीवार बनने के बाद लोगों का प्रवास करना काफी कम हो गया था। 1949 से 1962 के बीच 5 लाख लोग पूर्वी जर्मनी छोड़कर गए थे लेकिन 1962 से 1989 के बीच सिर्फ 5,000 लोगों ने ही पूर्वी जर्मनी छोड़ा। हालांकि ये दीवार पश्चिमी जर्मनी वालों के लिए अत्याचार करने का एक जरिया बन गया। उन्होंने बहुत से लोगों को सीमा पार करते हुए गोली मार दी। इस तरह से मनभेद और मतभेद को खत्म करने के लिए ही एक शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया गया और 1989 में आखिरकार बर्लिन की वॉल तोड़ी गई और जर्मनी का एकीकरण किया गया।

   
 
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